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चीन सीमा पर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, सेना की निगरानी में होगा संचालन

नई दिल्ली । केंद्र सरकार उत्तर-पूर्वी राज्य सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र स्थापित करेगी, जिनका संचालन पूर्व सैनिक करेंगे। इसी सिलसिले में भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग के सचिव ने चीन सीमा पर सिक्किम से लगे क्षेत्रों का दौरा करके पूर्व सैनिकों से संबंधित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का जायजा लिया है। केंद्र सरकार के इस फैसले को पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सुविधा को और अधिक मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।

पूर्व सैनिक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. नितेन चंद्रा ने सोमवार भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग के आउटरीच कार्यक्रम ‘समाधान अभियान’ के एक हिस्से के तहत सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने पूर्व सैनिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि राज्य सैनिक बोर्ड और जिला सैनिक बोर्डों को पूरे क्षेत्र में सामान्य सेवा केंद्र और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। डॉ. नितेन चंद्रा ने बताया कि सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों में खुलने वाले प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों का संचालन पूर्व सैनिक करेंगे।

उन्होंने गंगटोक में सिक्किम के मुख्य सचिव वीबी पाठक से मुलाकात करके पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य रोडमैप पर चर्चा की। इस बैठक के दौरान चर्चा की गई कि राज्य बागवानी विभाग की सहायता से पूर्व सैनिकों के सहकारी समूहों को क्षेत्र में एवोकाडो, संतरे, कीवी और फलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। महानिदेशक (पुनर्वास) मेजर जनरल एसबीके सिंह ने पूर्व सैनिकों के कौशल व दक्षताओं को बढ़ाने और उनके पुनर्वास के लिए उद्यमिता मॉडल के लिए उपलब्ध विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया।

भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग के सचिव ने भारतीय सेना के 17 माउंट डिवीजन का दौरा किया और जीओसी मेजर जनरल अमित कबथियाल ने उनका स्वागत किया। इस दौरान सचिव ने ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक, स्पर्श सुविधा केंद्र व सेवानिवृत्त सैनिक सुविधा केंद्र सहित विभिन्न रक्षा प्रतिष्ठानों का दौरा करके उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने पूर्व सैनिकों के साथ बातचीत करके पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल व उनके पुनर्वास सहित अन्य मुद्दों के बारे में पूछताछ की। समाधान अभियान के तहत पूरे क्षेत्र से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों ने हिस्सा लिया, जहां उनसे संबंधित कई मुद्दों पर उन्हें सहायता प्रदान की गई।

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